सीबीएसई कक्षा -12 हिंदी कोर

महत्वपूर्ण प्रश्न
पाठ – 04

ऐन फ्रैंक (डायरी के पन्ने)


महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

I. बोधात्मक प्रश्न

1. ऐन की डायरी से उसकी किशोरावस्था के बारे में क्या पता चलता है। ‘डायरी के पन्ने’ कहानी के आधार पर लिखिए।

उत्तर- ऐन की डायरी किशोर मन की ईमानदार अभिव्यक्ति है। इससे पता लगता है कि किशोरों को अपनी चिट्ठयों और उपहारों से अधिक लगाव होता है। वे जो कुछ भी करना चाहते हैं उसे बड़े लोग नकारते रहते हैं, जैसे ऐन का कश-विन्यास जो फिल्मी सितारों की नकल करके बनाया जाता था। इस अवसर में बड़ों द्वारा बात-बात पर कमी निकाली जाती है या किशोरों को टोका जाता है। यह बात किशोरों को बहुत ही नागवार गुजरती है। किशोर बड़ों की अपेक्षा अधिक ईमानदारी से जीते हैं। इन्हें जीने के लिए सुंदर, स्वस्थ वातावरण चाहिए। किशोरावस्था में ऐन की भाँति हम सभी अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

2. ‘ऐन की डायरी’ के अंश से प्राप्त होने वाली तीन महत्वपूर्ण जानकारियों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर- 'ऐन की डायरी' के अंश से प्राप्त होने वाली तीन महत्वपूर्ण जानकारियाँ निम्नलिखित हैं-

(i) हिटलर द्वारा यहूदियों को यातना देने के विषय में।

(ii) स्त्रियों की स्वतंत्रता के विषय में आधुनिक विचार।

(iii) डच लोगों की प्रवृति तथा प्रतिक्रिया।

3. ‘डायरी के पन्ने’ पाठ के आधार पर महिलाओं के बारे में ऐन फ्रैंक के विचारों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर- ऐन समाज में स्त्रियों की स्थिति को अन्यायपूर्ण कहती है। उसका मानना है कि शारीरिक अक्षमता व आर्थिक कमजोरी के बहाने से पुरुषों ने स्त्रियों को पिर में बाँधकर रखा है। आधुनिक युग में शिक्षा, काम व जागृति से स्त्रियों में जागृति आई है। अब स्त्री पूर्ण स्वतंत्रता याहती है। ऐन चाहती है कि स्त्रियों को पुरुषों के बराबर सम्मान मिले क्योंकि समाज के निर्माण में उनका योगदाने नेहत्वपूर्ण हैं। वह स्त्री जीवन के अनुभव को अतुलनीय बताती है।

4. अज्ञातवास में रहते हुए भी ऐन फ़िल्मों के प्रति अपनी रुचि व जानकारी कैसे बनाए रखती है?

उत्तर- ऐन अपने प्रिय फिल्मी कलाकारों की तसवीरें रविवार के दिन अलग करती है। उसके शुभचिंतक मिस्टर कुगलर, सोमवार के दिन सिनेमा एंड थियेटर पत्रिका ले आते थे। घर के बाकी लोग इसे पैसे की बरबादी मानते थे। उसे यह फायदा होता था कि साल भर बाद भी उसे फ़िल्मी कलाकारों के नाम सही-सही याद थे। उसके पिता के दफ़्तर में काम करने वाली ज़ब फिल्प देखने जाती तो वह पहले ही फिल्म के बारे में बता देती थी।

5. ए.एस.एस. का बुलावा आने पर फ्रैंक परिवार में सन्नाटा क्यों छा गया?

उत्तर- दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मन लोग यहूदियों पर अत्याचार करते थे। वे उन्हें यातनागृहों में भेज रहे थे। वे कहीं जा नहीं सकते थे। जब फ्रैंक परिवार में ए.एस.एस का बुलावा आया तो वे सभी सन्न रह गए। अब उन्हें असहनीय जुल्मों का शिकार होना पड़ेगा। सभी परेशान थे। वे इस बुलावे का अर्थ जानते थे। परिवार किसी गुप्त स्थान पर जाने की तैयारी करने लगा। जीवन के प्रति किसी अनहोनी की आशंका को सोच परिवार में सन्नाटा छा गया।

6. हालैंड के प्रतिरोधी दल भूमिगत लोगों की सहायता किस प्रकार करते थे ?

उत्तर- दूसरे विश्वयुद्ध में 'फ्री नीदरलैंड्स’ प्रतिरोधी दल था जो भूमिगत लोगों की सहायता करता था। वह पीड़ितों के लिए नकली पहचान-पत्र बनाता था, उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करता था, युवा इसाइयों के लिए काम की तलाश करता था। दल के लोग पुरुषों से कारोबार तथा राजनीति की और महिलाओं के साथ भोजन व युद्ध के कष्ट की बातें करते थे। वे हर समय खुशदिल दिखते थे तथा लोगों की रक्षा कर रहे थे।

7. ‘डायरी के पन्ने’ में ऐन ने आशा व्यक्त की है कि अगली सदी में ऐसा हुआ है? पक्ष या विपक्ष में तर्कसंगत उत्तर दीजिए।

उत्तर- ‘औरतें ज़्यादा सम्मान और सराहना की हक़दार बनेंगी।’ -क्या इस सदी में ऐसा आशाएँ इस सदी में काफी हद तक पूरी हुई हैं। महिलाओं को कानून के स्तर पर पुरुषों से अधिक अधिकार मिले हैं। वे शिक्षा, विज्ञान, उद्योग, राजनीति-हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। वे अपने पैरों पर खड़ी हैं तथा कुछ क्षेत्र में उन्होंने पुरुषों को हाशिए पर कर दिया है।

8. ‘ऐन की डायरी’ उसकी निजी भावनात्मक उथल-पुथल का दस्तावेज़ भी है। इस कथन की विवेचना कीजिए।

उत्तर- ऐन को अज्ञातवास के दो वर्ष डर व भय में गुजारने पड़े। यहाँ उसे समझने व सुनने वाला कोई नहीं था। यहाँ रहने वाले लोगों में वह सबसे छोटी थी। इस कारण उसे सदैव डाँट-फटकार मिलती थी। यहाँ उसकी भावनाओं को समझने वाला कोई नहीं मिलता। वह अपने सारे व्यक्तिगत अनुभव व मानसिक उथल-पुथल को डायरी के पन्ने पर लिखती है। इस तरह यह डायरी उसकी निजी भावनात्मक उथल-पुथल का दस्तावेज भी है।

9. ऐन फ्रैंक कौन थी? उसकी डायरी क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर- ऐन फ्रैंक एक यहूदी परिवार की लड़की थी। हिटलर के अत्याचारों से उसे भी अन्य यहूदियों की तरह अपना जीवन बचाने के लिए दो वर्ष से अधिक समय तक अज्ञातवास में रहना पड़ा। इस दौरान उसने अज्ञातवास की पीड़ा, भय, आतंक, प्रेम, घृणा, हवाई हमले का डर, किशोर सपने, अकेलापन, प्रकृति के प्रति संवेदना, युद्ध की पीड़ा आदि का वर्णन अपनी डायरी में किया है। यह डायरी यहूदियों के खिलाफ अमानवीय दमन का पुख्ता सबूत है। इस कारण यह डायरी प्रसिद्ध है।

10. ऐन फ्रैंक की डायरी के आधार पर नाज़ियों के अत्याचारों पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर- ऐन-फ्रैंक की डायरी से ज्ञात होता है कि दूसरे विश्वयुद्ध में नाजियों ने यहूदियों को अनगिनत यातनाएँ दीं तथा उन्हें भूमिगत जीवन जीने के लिए मजबूर कर दिया। डर इतना था कि ये लोग सूटकेस लेकर भी सड़क पर नहीं निकल सकते थे। उन्हें दिन का सूर्य व रात का चंद्रमा देखना भी वर्जित था। इन्हें राशन की कमी रहती थी तथा बिजली का कोटा भी था। ये फटे-पुराने कपड़े और घिसे-पिटे जूतों से काम चलाते थे।

II. निबंधात्मक प्रश्न

1. ऐन की डायरी के माध्यम से हमारा मन सभी युद्ध पीड़ितों के लिए कैसा अनुभव करता है? ‘डायरी के पन्ने’ कहानी के आधार पर बताइए।

उत्तर- ऐन की डायरी में युद्ध पीड़ितों की ऐसी सूक्ष्म पीड़ाओं का सच्चा वर्णन है जैसा अन्यत्र कहीं नहीं मिलता। इससे पीड़ितों के प्रति हमारा मन करुणा और दया से भर जाता है। मन में हिंसा और युस्श के प्रति घृणा का भाव आता है। हम सोचते हैं कि युद्ध, विजेता और पराजित पक्ष दोनों के लिए ही आघात और पीड़ा देनेवाला होता है। जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं के लिए भी नागरिकों के नन्हे बच्चों की कितना भटकना पड़ता है, यह पीड़ा की पराकाष्ठा है। यदि ऐन के साथ ऐसा बुरा व्यवहार न हुआ होता तो उसकी इस तरह अकाल मृत्यु न हुई होती। ऐन के परिवार के साथ जैसा हुआ वैसा न जाने कितने लोगों के साथ हुआ होगा। इसलिए वे लोग जो युद्ध का कारण बनते हैं वे ऐन की डायरी पढ़कर उसे अपने प्रति अनुभव करके देखें।

2. ‘डायरी के पन्ने’ पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि ऐन फ्रैंक बहुत प्रतिभाशाली तथा परिपक्व थी?

उत्तर- ऐन फ्रैंक की प्रतिभा और धैर्य का परिचय हमें उसकी डायरी से मिलता है। उसमें किशोरावस्था की झलक कम और सहज शालीनता अधिक देखने को मिलती हैं। उसकी अवस्था में अन्य कोई भी होता तो विचलित एवं बेचैनी का आभास देता। ऐन ने अपने स्वभाव और आवस्था पर नियंत्रण पा लिया था। वह एक सकारात्मक, परिपक्व और सुलझी हुई सोच के साथ आगे बढ़ रही थी। उसमें कमाल की सहनशक्ति थी। अनेक बातें जो उसे बुरी लगती थीं, उन्हें वह शालीन चुप्पी के साथ बड़ों के सम्मान करने के लिए सहन कर जाती थी।

पीटर के प्रति अपने अंतरंग भावों को भी वह सहेज कर केवल डायरी में व्यक्त करती थी। अपनी इन भावनाओं को वह किशोरावस्था में भी जिस मानसिक स्तर से सोचती थी वह वास्तव में सराहनीय है। परिपक्व सोच का ही परिणाम था कि वह अपने मन के भाव, उद्गार, विचार आदि डायरी में ही व्यक्त करती थी। यदि ऐन में ऐसी सधी हुई परिपक्वता न होती तो हमें युद्ध काल की ऐसी दर्द भरी कहानी पढ़ने को नहीं मिल सकती थी।

3. ‘डायरी के पन्ने’ पाठ के आधार पर ऐन द्वारा वर्णित सेंधमारी वाली घटना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर- ऐन ने अपनी डायरी में अनेक कष्ट देने वाली बातों में सबसे प्रमुख अज्ञातवास को ही कहा है। किसी बस्ती में छिपकर रहना बड़ा ही कठिन काम है। 11 अप्रैल, 1944 की जो घटना ऐन ने लिखी है उससे पता चलता है कि वे लोग अनेक कष्टदायी स्थितियों के साथ-साथ सेंधमारों से भी संघर्ष करते थे।

उस दिन रात साढे नौ बजे पीटर ने जिस प्रकार ऐन के पिता को बाहर बुलाया उससे ऐन समझ गई कि दाल में कुछ काला है। सेंधमारों ने अपना काम शुरू कर दिया था। इसलिए ऐन के पिता, मिस्टर वान दान और पीटर लपककर नीचे पहुँचे। एने, मार्गोट उनकी माँ और मिसेज वान डी ऊपर डरे-सहमे से इंतजार करते रहे। एक जोर के धमाके की आवाज से इन लोगों के होश उड़ गए। नीचे गोदाम में सन्नाटा था और पुरुष लोग वहीं सेंधमारों के साथ संघर्ष कर रहे थे। डर से काँपने पर भी ये लोग शांत बने रहे। तकरीबन 15 मिनट बाद ऐन के पिता सहमे हुए ऊपर आए और इन लोगों से बत्तियाँ बंद करके ऊपर छत पर चले जाने को कहा, अब ये लोग डरों की प्रतिक्रिया जताने की स्थिति में भी नहीं थे। सीढ़ियों के बीच वाले दरवाजे पर ताला जड़ दिया गया। बुककेस बंद कर दिया गया, नाइट लैंप पर स्वेटर डाल दिया गया। पीटर अभी सीढ़ियों पर ही था कि जोर के दो धमाके सुनाई दिए। उसने नीचे जाकर देखा कि गोदाम की तरफ का आधा भाग गायब था। वह लपककर होम गार्ड को चौकन्ना करने भागा। मिस्टर वान ने समझदारी दिखाते हुए शोर मचाया ‘पुलिस। पुलिस’ यह सुनकर सेंधमार भाग गए और गोदाम के फट्टे फिर से लगा दिए गए। लेकिन वे कुछ ही मिनट में लौट आए और फिर से तोड़-फोड़ी शुरू हो गई। उस डरावनी रात में बड़ी मुश्किल से पुरुषों ने संघर्ष करके जान बचाई।

4. ‘डायरी के पन्ने’ पाठ की लेखिका के ये शब्द –‘स्मृतियाँ मेरे लिए पोशाकों की तुलना में ज़्यादा मायने रखती है।’ इस बात को सिद्ध करते हैं कि डायरी लेखन उसके जीवन में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। सिद्ध कीजिए।

उत्तर- लेखिका के परिवार ने जैसे अज्ञातवास में जाने का निर्णय लिया, उसने सबसे पहले अपनी डायरी को बैग में रखा। इसके बाद उसने अनेक अजीबोगरीब चीजें बैग में डाली। इनमें से अधिकांश चीजें उसे उपहार में मिली थीं। इन उपहारों से जुड़ी स्मृतियाँ उसके लिए महत्वपूर्ण थी। वेह पोशाकों को कम महत्व देती थी। उसने अपनी सभी भावनाओं की अभिव्यक्ति डायरी में लिखी, जबकि परिवार में अन्य सदस्य भी थे। उसने परिवार, समाज, सरकार व अपने विचारों को डायरी में लिखा। इससे पता चलता हैं कि डायरी उसके जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

5. ‘डायरी के पन्ने’ पाठ के आधार पर ऐन के व्यक्तित्व की तीन विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर- ‘डायरी के पन्ने’ पाठ के आधार पर ऐन के व्यक्तित्व की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(i) चिंतक व मननशील-ऐन का बौद्धिक स्तर बहुत ऊँचा है। वह नस्लवादी नीति के प्रभाव को प्रस्तुत करती है। उसकी डायरी भोगे हुए यथार्थ की उपज है। वह अज्ञातवास में भी अध्ययन करती है।

(ii) स्त्री संबंधी विचार-ऐन स्त्रियों की दयनीय दशा से चिंतित है। वह स्त्री जिव के अनुभव को अतुलनीय बताती है। वह चाहती है कि स्त्रियों को पुरुषों के बराबर सम्मान दिया जाए। वह स्त्री विरोधी पुरुषों व मूल्यों की भर्त्सना करना चाहती हैं।

(iii) संवेदनाशील-ऐन संवेदनशील लड़की है। उसे बात-बात पर सबसे डाँट पड़ती है क्योंकि उसकी भावनाओं को समझने वाला कोई नहीं है। वह लिखती भी है-“काश! कोई तो होता जो मेरी भावनाओं को गंभीरता से समझ जाता।” अपनी डायरी में अपनी गुड़िया को वह पत्र लिखती है।

6. ऐन हालैंड की तत्कालीन दशा के बारे में क्या बताती हैं ?

अथवा

ऐन की डायरी निजी कहानी न होकर तत्कालीन समाज का दर्पण है, कैसे?

उत्तर- ऐन ने बताया है कि हालैंड की व्यवस्था बहुत खराब है। यहाँ लोगों को राशन के लिए लाइन में लगना पड़ता है। मरीजों को सही इलाज नहीं मिलता। चोरी-चकारी बहुत बढ़ गई है लोगों ने अँगूठी तक पहनना छोड़ दिया। आठ दस साल के छोटे बच्चे घरों की खिड़कियाँ तोड़कर जो सामान हाथ लगता, उसे उठा ले जाते हैं। लोग पाँच मिनट के लिए अपना घर नहीं छोड़ नहीं सकते, क्योंकि इतने समय में ही चोरी हो जाती है। अखबारों में चोरी का सामान लौटाए जाने के विज्ञापन छपने लगे थे। गलियों में लगी बिजली से चलने वाली घड़ियाँ लोग उतारकर ले गए तथा सार्वजनिक टेलीफोनों के पुर्जे भी गायब हो गए।

डच लोग भूखे थे। पुरुषों को जर्मनी भेजा जा रहा था। बच्चे बीमार व भूखे थे। सरकारी लोगों पर हमला बढ़ रहा था। हर जगह भाई-भतीजावाद फैला था।

7. पीटर के प्रति ऐन ने अपनी भावनाएँ किस प्रकार व्यक्त की है?

उत्तर- पीटर व ऐन-दोनों किशोर हैं तथा एक-दूसरे को चाहते हैं। ऐन बताती है कि पीटर उसे एक दोस्त की तरह प्यार करता है और यह प्यार दिन-पर-दिन बढ़ता जा रहा है। वह भी उसकी दीवानी है। अगर वह उसे न मिले तो उसकी हालत खराब हो जाती है। पीटर अच्छा व भला लड़का है, परंतु धर्म के प्रति उसकी नफरत, खाने के बारे उसका बातें करना ऐन को पसंद नहीं हैं। वह सहनशील, शांतिप्रिय व आत्मीय व्यक्ति है। वह ऐन की आपत्तिजनक बातें भी सुन लेता है। वह प्रायः मौन रहता है। वह ऐन से अपने मन की बात नहीं कहता। ऐन उसे घुन्ना मालती है।

III . मूल्यपरक प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर पूछे गए मूल्यपरक प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(क) हर कोई जानता था कि बुलावे का क्या मतलब होता है। यातना शिविरों के नजारे और वहाँ की कोठरियों के दृश्य मेरी आँखों के आगे तैर गए। हम अपने पापा को इस तरह की नियति के भरोसे कैसे छोड़ सकते थे। हम उन्हें हर्गिज़ नहीं जाने देंगे। मार्गोट ने उस वक्त कहा था जब वह ड्राइंग रम में माँ की राह देख रही थी। माँ मिस्टर वान दान से पूछने गई हैं कि हम कल ही छुपने की जगह पर जा सकते हैं। वान दान परिवार भी हमारे साथ जा रहा है। हम लोग कुल मिलाकर सात लोग होंगे। मौन। हम आगे बात ही नहीं कर पाए। यह खयाल कि पापा यहूदी अस्पताल में किसी को देखने गए हुए हैं, माँ के लिए इंतजार की लंबी घड़ियाँ गरमी सस्पेंस, इन सारी चीजों ने हमारे शब्द ही हमसे छीन लिए थे। तभी दरवाजे की घंटी बजी-यह हैलो ही होगा, मैंने कहा था।

दरवाज़ा मत खोलो, मार्गोट ने हैरान होते मुझे रोका, लेकिन इसकी जरूरत नहीं थी क्योंकि हमने नीचे से माँ और मिस्टर वान दान को हैलो से बात करते हुए सुन लिया था। तब दोनों ही भीतर आए और अपने पीछे दरवाजा बंद कर दिया। जब भी दरवाज़े की घंटी बजती तो मुझे या मर्गोट को उचककर नीचे देखना पड़ता कि क्या पापा आ गए हैं।

प्रश्न- (i) हम उन्हें हरगिज न जाने देंगे-यदि आप ऐन फ्रैंक की जगह होते तो अपने पापा के साथ कैसे व्यवहार करते और क्यों?

(ii) ऐन फ्रैंक के परिवार की तरह यदि आपके परिवार पर कोई संकट आ जाए तो आप उसका समाना कैसे करेंगे?

(iii) बड़ो तथा अपनों के प्रति अपनत्व दर्शाने के लिए आप क्या-क्या करेंगे ?

उत्तर- (i) यदि मैं ऐन फ्रैंक की जगह होता तो संकट की इस घड़ी में ऐसा बुलावा आने पर मैं भी उन्हें अकेले न जाने देता। परिवार के सभी लोग मिलकर संकट का सामने करते क्योंकि मैं अपने बड़ों से अत्यंत अपनत्व एवं लगाव रखता हूँ तथा उनका सम्मान करता हूँ।

(ii) यदि ऐन फ्रैंक के परिवार की तरह मेरे परिवार पर कोई संकट आता मैं परिवार के सभी लोगों के साथ मंत्रणा करता। मैं धैर्य ने खोने, साहस बनाए रखने के लिए अन्य सदस्यों को प्रोत्साहित करता। मैं घर के बड़ों की राय मानकर साहसपूर्वक संकट का सामना करता।

(iii) बड़ो तथा अपनों के प्रति अपनत्व दर्शाने के लिए मैं उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनता, उनकी आज्ञा मानता। समय निकालकर उनके साथ बैठता तथा उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखता।

(ख) अज्ञातवास...हम कहाँ जाकर छुपेंगे? शहर में? किसी घर में? किसी परछत्ती पर? कब... कहाँ... कैसे... ये ऐसे सवाल थे जो मैं पूछ नहीं सकती थी लेकिन फिर भी ये सवाल मेरे दिमाग में कुलबुला रहे थे।

मार्गोंट और मैंने अपनी बहुत जरूरी चीजें एक थैले में भरनी शुरू कीं।

मैंने सबसे पहले अपने थैले में यह डायरी ठूँसी। इसके बाद मैंने कर्लर, रुमाल, स्कूली किताबें, एक कंघी और मैंने सबसे पहले अपने थैले में यह डायरी ठूँसी में अजीबोगरीब चीजें भर डाली, फिर भी मुझे अफ़सोस नहीं है। स्मृतियाँ मेरे लिए पोशाकों की तुलना में ज्यादा मायने रखती हैं। तब हमने मिस्टर क्लिीमेन को फ़ोन किया कि क्या वे शाम को हमारे घर आ पाएँगे।

प्रश्न- (i) यदि अचानक आपको अपरिचित जगह पर रहने जाना हो तो आपके मन में कौन-कौन से सवाल होंगे? ये सवाल ऐन के सवालों से कितने भिन्न होंगे ?

(ii) यदि आप ऐन फ्रैंक की जगह होते और अन्य परिस्थितियाँ वही होती तो आप अपने साथ क्या-क्या ले जाना चाहते और क्यों ?

(iii) यदि मिस्टर क्लिमेन जैसी ही मदद की अपेक्षा आपसे कोई करता तो आप किस-किस रूप में उसकी मदद करते और क्यों ?

उत्तर- (i) यदि मुझे अचानक अपरिचित जगह पर रहने जाना होता तो मेरे मन में भी फ्रैंक जैसे ही सवाल उठते, जैसे-कहाँ रहना है, कितने दिन रहता है, कौन-कौन साथ रहेंगे, कैसे समय बीतेगा आदि।

(ii) यदि मैं ऐन फ्रैंक की जगह होता और यूँ अचानक घर छोड़ना पड़ता तो अपनी पुस्तकें, कपड़े, रुपये, कई रुमालें, जुराबें, कुछ दवाइयाँ तथा दैनिकोपयोगी वस्तुएँ ले जाता क्योंकि ऐसे माहौल में छिप छिपकर रहना पड़ता और कुछ खरीदने के लिए बाहर न जा पाता।

(iii) यदि मिस्टर क्लीमेन जैसी ही मदद की अपेक्षा कोई मुझसे करता तो संकट की घड़ी में मैं उसकी मदद अवश्य करता। मैं उसका मनोबल बढ़ाता उसका हौसला बढ़ाते हुए उसकी जरूरत की वस्तुएँ उपलब्ध कराता। मैं उसे हिम्मत से काम लेने की सलाह देता, क्योंकि हमारे मानवीय मूल्य त्याग, सहयोग, अपनत्व आदि ऐसा करने के लिए हमें प्रेरित करते।

(ग) ऐन-फ्रैंक का परिवार सुरक्षित स्थान पर जाने से पहले किस मनोदशा से गुजर रहा था और क्यों ? ऐसी ही परिस्थितियों से आपको दो-चार होना पड़े तो आप क्या करेंगे?

उत्तर- द्वतीय विश्व युद्ध के समय हालैंड के यहूदी परिवारों को जर्मनी के प्रभाव के कारण बहुत सारी अमानवीय यातनाएँ सहनी पड़ी। लोग अपनी जान बचाने के लिए परेशान थे। ऐसे कठिन समय में जब ऐन-फ्रैंक के पिता को ए.एस.ए. के मुख्यालय से बुलावा आया तो वहाँ के यातना शिविरों और काल कोठरियों के दृश्य उन लोगों की आँखों के सामने तैर गए। ऐन-फ्रैंक और उसका परिवार घर के किसी सदस्य को निमति के भरोसे छोड़ने के पक्ष में न था। वे सुरक्षित और गुप्त स्थान पर जाकर जर्मनी के शासकों के अत्याचार से बचना चाहते थे। उस समय ऐन के पिता यहूदी अस्पताल में किसी को देखने गए थे। उनके आने की प्रतीक्षा की घड़ियाँ लंबी होती जा रही थीं। दरवाजे की घंटी बजते ही लगता था कि पता नहीं कौन आया होगा। वे भय एवं आतंक के डर से दरवाज़ा खोलने से पूर्व तय कर लेना चाहते थे कि कौन आया है? वे घंटी बजते ही दरवाज़े से उचककर देखने का प्रयास करते कि पापा आ गए कि नहीं। इस प्रकार ऐन फ्रैंक का परिवार चिंता, भय और आतंक के साये में जी रहा था।

यदि ऐसी ही परिस्थितियों से हमें दो-चार होना पड़ता तो मैं अपने परिवारवालों के साथ उस अचानक आई आपदा पर विचार करता और बड़ों की राय मानकर किसी सुरक्षित स्थान पर जाने का प्रयास करता। इस बीच सभी से धैर्य और साहस बनाए रखने का भी अनुरोध करता।